मानव पाचन तंत्र (human digestive system) कैसे काम करता / important points/ important questions for exam
मानव पाचन तंत्र/digestive system
मनुष्य में पोषण मानव पाचन तंत्र के माध्यम से होता है| इसमें आहार नली (alimentary canal) और उससे संबद्ध ग्रंथियां (glands) होती हैं| मनुष्य की आहार नली मुंह से गुदा (anus) तक और करीब 9 मीटर लंबी होती है| विभिन्न ग्रंथियां आहार नली में खुलती हैं और आहार नली में पाचक रसों का स्राव डालती हैं|
मानव पाचन तंत्र में पाए जाने वाले विभिन्न अंग

मुंह, ग्रासनली/ भोजननली (Oesophagus), पेट, छोटी आंत और बड़ी आंत | तंत्र से जुड़ी ग्रंथियां हैं– लार ग्रंथियां (Salivary glands), यकृत (Liver) और अग्न्याशय (Pancreas)|
जहाँ पर छोटी आँत और बड़ी आँत मिलती है ,उस स्थान पर एक नली विकसित होती है जिसे हम सीकम कहते है ।
मानव पाचन तंत्र का कार्य / कैसे मानव पाचन तंत्र (Digestive system ) कार्य करता है ?

हमारा पोषण पाँच चरणों में पूरा होता है जो चरण नीचे दिए गए है ।
पोषण के चरण / Step of nutrition
1.भोजन का अन्तग्रहण/ Engestion
2.पाचन/Digestion
3.अवशोषण/Absorption
4.स्वांगीकरण/Assimulation
5.मलत्याग / Defaecation
⓵ भौजन का अंतग्रहण / Engestion
यह पोषण का पहला चरण है इसमें हम बात करेंगे की भोजन किन अंगों से होकर गुजरता है ।
1.मुखगुहा
यह आहारनाल का पहला भाग होता है जहाँ से भोजन प्रवेश करता है । हमारा मुख एक दरार के समान होता है जो की दोनों जबड़ो के बीच में खुलता है ।
2.ग्रसनी
मुखगुहा का पिछला भाग ग्रसनी कहलाता है । यह 12 cm लंबी संरचना होती है ।
ग्रसनी में भोजन निगलने तथा साँस लेने के लिए दो समान मार्ग होते है ।
3.ग्रासनली
यह मांसपेशियों से निर्मित 9- 10 इंच लंबी नली होती है । पाचन ग्रंथियां इनमे नही पायी जाती है इनमे केवल श्लेष्म ग्रंथि पायी जाती है जो की भोजन को चिकना बनाती है ।
4.आमाशय
➤ यह एक J आकृति की संरचना होती है । यहाँ संकुचन व अंकुचन की सहायता से भोजन का मंथन होता है ।
➤ इसके बाद भोजन अमाशय से होकर ग्रहणी में जाता है जो की छोटी आँत का एक भाग होता है ।फिर इसके बाद भोजन बड़ी आँत से होकर गुहा से बाहर निकल जाता है
⓶ मानव में पाचन क्रियाए( Digestive action in human ) / पाचन तंत्र का कार्य
मनुष्य का आहार नाल मुख ( mouth ) से लेकर मलद्वार( Anus ) तक फैला हुआ होता है ।इसमे हम यह चर्चा करेंगे कि हमारे अंगों में पाचन की क्रिया किस प्रकार से पूरी होती इसमे किस अंग की क्या भूमिका होती है । यहाँ से बहुत प्रश्न परीक्षा में पूछे जाते है।
1.मुखगुहा में पाचन
हमारे जो दाँत होते है वह भोजन को छोटे छोटे टुकड़ों मे बदल देते है और जैसे ही हम भोजन को मुँह में रखते है तो हमारे लार ग्रंथि से लार (saliva ) निकलना शुरू हो जाता है ।
लार /saliva
➤ हल्का सा अम्लीय ( ph 6-7) होता है इसमे टायलिन और एमिलेज नामक एंजाइम पाया जाता है जो की भोजन को पचाने मे मदद करते है ।
लार /saliva के कार्य
➤ जल तथा श्लेष्म (mucus)- यह भोजन को चिकना बनाता है जिससे की भोजन को निगलने में आसानी होती है ।
टायलिन
➤ यह एंजाइम भोजन के मंड( starch) को शर्करा ( sugar ) में बदल देता है इसे हम सैलाइवरी एमाइलेज भी कहते है ।
पोली सैकेरिडेस एंजाइम
➤ लार में यह एंजाइम बैक्टीरिया को मारने में मदद करता है ।
➤ बाइकार्बोनेट , फास्फेट , तथा म्यूसिन लार में बफर का कार्य करते है ।
2.ग्रसनी
➤ इसे हम उभयमार्ग भी कहते है क्योंकि यह भोजन और वायु दोनों के लिए रास्ता होता है ।
➤ ग्रसनी के अंतिम भाग पर एक घाटी ढक्कन( एपिग्लाटिस ) संरचना होती है । जिसे हम पल्लुनुमा संरचना भी कहते है ।
3.ग्रासनली
ग्रासनली का ऊपरी सिरा घाटी ढक्कन(एपिग्लाटिस ) से मिलता है।
➤ घाटी ढक्कन का यह काम होता है कि वह भोजन को ग्रासनली में तथा वायु को साँस की नली में भेजता है।
➤ ग्रासनली एक नलिकाकार संरचना होती है जो की अमाशय तथा ग्रसनी को जोड़ती है ।
भोजन की गति ग्रासनली में बहुत धीरे से होती है जिसे हम क्रमानुकुंचन कहते है ।
4.अमाशय
➤ यह एक थैलीनुमा संरचना होती है इसका आयतन 1-3 लीटर तक होता है ।
➤ अमाशय की दीवार पर जठर ग्रंथियां होती है जो की जठर रस ( gastric juice) उत्पन्न करती है यह रस अम्लीय होता है( PH 0.9-1.5)
जठर रस में मौजूद निम्न पदार्थ
जठर रस में 97-99% जल तथा कुछ श्लेष्म ( जो भोजन को चिकना बनाता है ) मौजूद होता है।
HCL ( हाइड्रो क्लोरिक अम्ल )
यह भोजन को अम्लीय बनाता है व हानिकारक जीवाणु को नष्ट करता है । और भोजन को सड़ने से बचाता है तथा हड्डियों को भी यह गलाता है।
पेप्सिन – भोजन के प्रोटीन को पेप्टोन तथा पॉली पेप्टॉइड में बदलता है ।
रेनिन- यह दूध की विलेय प्रोटीन ( केसिन) को ठोस एंव अविलेय दही मे बदल देता है ।
5.ग्रहणी में पाचन
अमाशय में बना भोजन काइम कहलाता है यह भोजन पाइलोरस कपाट से होता हुआ ग्रहणी तक पहुँचता है और फिर भोजन पहले पित्त रस और बाद में अग्नाशयी रस से मिलता है ।
पित्त रस ( Bile juice )
Bile juice स्राव रासायनिक उद्दिपनो से प्रभावित होता है ।
➤ इन रासायनिक योगिकों को हम कोलेगोग ( chologague) कहते है यह हरे और पीले रंग का क्षारीय ( ph-7.6-7.7) तरल होता है
➤ इसमें कोई पाचक एंजाइम नही पाया जाता है फिर भी पाचन में इसका बहुत महत्व होता है ।
पित्त रस के कार्य
➤ यह क्रमानुकुंचन गति को बढ़ाता है ताकी पाचक रस काइम में मिल सके।यह वसा का पायसीकरण भी करता है । ताकि स्टीएप्सिन एंजाइम वसा का अधिक पाचन कर सके ।
अग्नाशयी रस
इसमे 4 प्रकार के पाचक एंजाइम पाए जाते है।
① ट्रिप्सिन एवं काइमोट्रिप्सिन- यह काइम की शेष प्रोटीन तथा पेप्टोन को विलेय अमीनो अम्ल में बदल देता है।
② ऐमिलोप्सिन- यह मण्ड को माल्टोज शर्करा में बदल देता है।
③ स्टीएप्सिन ( Steapsin)– यह पायसीकृत वसा को वसीयअम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदल देता है।
④ कार्बोक्सीपेप्टिडेस– प्रोटीन के पालीपेप्टाइड अणुओं को अमीनो अम्ल में विघटित करता है।
6.छोटी आँत में पाचन/ small Intestine
➤ भोजन के अधिकांश भाग का पाचन ग्रहणी में हो जाता है तथा बचे हुए भोजन का पाचन छोटी आँत में होता है
➤ छोटी आँत की दीवारों पर पाचन ग्रंथियां ( ब्रूनर ग्रंथियां तथा लीवरकन) जिनसे आंत्रीय रस निकलता है । एक दिन में यह रस 6-7 लीटर निकलता है ।
आंत्रीय रस में पाए जाने वाले एंजाइम
एंटरोकाइनेस ( Enterokinase)- यह अग्नाशय रस के निष्क्रिय ट्रिप्सिनोजन को सक्रिय ट्रिप्सिन में बदलता है।
इरेप्सिन ( Erapsin)- यह पॉलीपेप्टाइडों को एमीनो अम्ल में बदलता है।
आर्जिनेस (Arginase)-यह अर्जिनीन ऐमीनो अम्ल को यूरिया में बदलता है।
माल्टेज (Maltase) – यह माल्टोज को ग्लूकोज में बदलता है।
सुक्रेज ( Sucrase )-यह सूक्रोज को फ्रक्टोज में बदलता है।
लैक्टेज ( Lactase)– यह दुग्ध शर्करा (lactose) का ग्लूकोज में बदलता है।
लाइपेज ( Lipase)- यह शेष वसाओं को वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदलता है।
7.सीकम में पाचन
➤ मनुष्य में सीकम बहुत छोटा होता है और इसमे सेलुलोज का पाचन नही होता है मांसाहारी जंतु में सीकम शाकाहारी जंतु की तुलना में छोटा होता है ।
8.बड़ी आँत
➤ छोटी आँत में बचा हुआ अपचित भोजन बड़ी आँत में आता है और इसकी दीवारों पर शेष लवणों तथा जल का अवशोषण हो जाता है और बाकी बचा हुआ भोजन मल के रूप मे मलाशय में जमा होता रहता बै और समय समय पर मल द्वार से बाहर निकलता रहता हैं ।
⓷ अवशोषण / Absorption
पचे हुए भोजन का रक्त में पहुँचने की क्रिया को अवशोषण कहते है । अवशोषण मुख्य रूप से छोटी आँत में होता है
खाद्य पदार्थ | अवशोषण योग्य पाच्य पदार्थ |
कार्बोहाइड्रेट्स प्रोटीन वसा | ग्लूकोज , गैलेक्टोज़ एमिनो अम्ल वसीय अम्ल,ग्लिसरोल,मोनो डाई और ट्राई ग्लिसरॉइड |
पचे हुए भोजन के पूर्ण रूप से अवशोषण के लिए आँत में अधिक क्षेत्रफल होना चाहिए इसलिए छोटी आँत की भीतरी भित्ति पर रसांकुर( villi)पाए जाते है जिनका काम अवशोषक के लिए पृष्ठ प्रदान करना होता है ।
⓸ स्वांगीकरण / Assimilation
➤ जो हमारा पचा हुआ भोजन होता है वो घुलनशील पदार्थ के रूप में हमारे विभिन्न उत्तको के कोशिका द्रव्य में विलीन हो जाते है जिससे हमारे अंगों को ऊर्जा मिलती है इस क्रिया को हम स्वांगीकरण कहते है ।
⓹ मल परित्याग / Egestion
➤ पूरी पाचन क्रिया के बाद भी जो भोजन पच नही पाता वह बडी आँत में चला जाता है । फिर यहाँ इसका पुनः अवशोषण होता है । तथा अंत मे अवशोषण के बाद बचा हुआ भाग समय समय पर गुदा द्वार से बाहर निकल जाता है ।
मानव पाचन तंत्र महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तरी / Important Questions
✔ हिपेरिन प्रोटीन का निर्माण कहाँ होता है ?
यकृत में ( liver )
✔ पाच्य पदार्थो के पोषण की इकाई क्या है ?
विलाई ( villi)
✔ विटामिन A तथा D कहाँ संचित होता है ?
यकृत में
✔ इन्सुलिन की अधिक मात्रा से कौन सा रोग होता है ?
हाइपोग्लाइसीमिया
✔ स्वस्थ मनुष्य में कितना आंत्रिक रस निकलता है ?
1.5- 2 लीटर
✔जठर रस किन ग्रंथियो से निकलता है ?
पाइलोरिक ग्रन्थियों से
✔ पाचन तंत्र के किस रस में कोलेस्ट्रॉल पाया जाता है ?
पित्त में
✔ इन्सुलिन की खोज किसने की ?
बैटिंग एवं वेस्ट ने
✔ वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल का अवशोषण किसके द्वारा होता है ?
लसिका केशिका द्वारा
✔ भूख किसके द्वारा नियंत्रित होता है ?
हाइपोथेलेमस
Question 1 |
बड़ी आंत | |
छोटी आंत | |
यकृत | |
पेट |
Question 2 |
छोटी आँत
| |
यकृत | |
अग्नाशय | |
बडी आँत
|
Question 3 |
डायलिसिस
| |
हिमोलिसिस | |
ओसमोसिस | |
पैरालिसिस |
Question 4 |
ट्रिप्सिन | |
टायलिन | |
गैस्ट्रीन | |
पेप्सिन |
Question 5 |
बिलुरुबिन
| |
बिलवर्डिन | |
A & B both | |
इनमे से कोई नही |
Question 6 |
इनेमल के
| |
डेण्टाइन के | |
मज्जा के | |
ओडोन्टोब्लास्ट के |
Question 7 |
यकृत | |
गुर्दा | |
अग्नाशय | |
बड़ी आँत |
Question 8 |
समाजात अंग है
| |
समरूप अंग है | |
विश्लेशी अंग है | |
अवशेषी अंग है |
Question 9 |
आमाशय
| |
थायराइड | |
अग्नाशय | |
यकृत |
Question 10 |
क्रमाकुंचन
| |
अनुशिथिलिन | |
दोलनी | |
इनमे से कोई नही |
Question 11 |
गैस्ट्रिन
| |
ये सभी | |
मोटिलिन | |
सीक्रेटिन |
Question 12 |
पित्ताशय
| |
आमाशय | |
यकृत | |
अग्न्याशय |
Question 13 |
वसा
| |
ग्लूकोज़ | |
सेल्युलोज | |
लिपिड्स |
Question 14 |
यकृत
| |
फेफड़े | |
वृक्क | |
ह्रदय |
Question 15 |
विटामिन है | |
बैक्टीरिया है | |
वायरस है | |
जैव उत्प्रेरक है |
Question 16 |
लार ग्रंथियां और अग्न्याशय | |
लार ग्रंथियां और यकृत | |
यकृत और अग्न्याशय | |
लार ग्रंथियां, यकृत और अग्न्याशय |
Question 17 |
वसा
| |
विटामिन | |
प्रोटीन | |
स्टार्च |
Question 18 |
प्लप | |
ग्लूकोज | |
ग्लाइकोजेन | |
कार्बोहाइड्रेट |
Question 19 |
यह भोजन को तोड़ता है | |
इनमें से कोई नहीं | |
यह भोजन को अम्लीय बनाता है
| |
यह भोजन को क्षारीय बनाता है |
Question 20 |
ह्रदय
| |
फेफड़े | |
यकृत | |
गुर्दे |
मानव पाचन तंत्र ( digestive system ) में हमने पड़ा की मानव में भोजन के पाचन के लिए किन किन अंगों की भूमिका होती है कौन से एंजाइम क्या कार्य करते है । इस टॉपिक से काफी प्रश्न परीक्षा में बनते है जैसे किस अंग से कौन सा एंजाइम निकलता है उसका कार्य क्या है इसी प्रकार के प्रश्न घुमा फिराकर इससे बनाये जाते है ।
अगले भाग में हम पाचन ग्रन्थियों और पाचन तंत्र के रोग के बारे में चर्चा करेंगे
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