उत्तराखंड में सूखते जलस्रोतों और घटते नदी प्रवाह को बचाने के लिए सरकार ने नदी पुनर्जीवन की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उत्तराखंड एक जिला एक नदी योजना के तहत प्रदेश के सभी 13 जिलों में एक-एक प्रमुख नदी को चिन्हित कर उसके वैज्ञानिक तरीके से पुनर्जीवन और संरक्षण पर काम किया जा रहा है।
यह पहल स्प्रिंग एंड रिवर रिजुवेनेशन अथॉरिटी (SARRA) के माध्यम से संचालित की जा रही है। योजना का उद्देश्य सिर्फ नदी में पानी बढ़ाना नहीं, बल्कि नदी के पूरे जलागम क्षेत्र, जलस्रोतों, भूजल रिचार्ज और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना है। (Sarra Uttarakhand)
क्या है उत्तराखंड एक जिला एक नदी योजना?
एक जनपद–एक नदी पहल के तहत प्रत्येक जिले में स्थानीय जलवैज्ञानिक महत्व, पर्यावरणीय स्थिति और सामाजिक-आर्थिक उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए एक प्रमुख नदी को प्राथमिकता दी गई है।
SARRA के अनुसार योजना में नदी-केंद्रित वैज्ञानिक और डेटा आधारित प्लानिंग पर जोर दिया जा रहा है। इसके अंतर्गत नदी के जलागम क्षेत्र का अध्ययन, जलस्रोतों का संरक्षण, वर्षा आधारित धाराओं का उपचार और स्थानीय समुदाय की भागीदारी जैसे उपाय किए जाएंगे। (Sarra Uttarakhand)
उत्तराखंड के 13 जिलों में कौन-सी नदी चुनी गई?
उपलब्ध SARRA सूची और कुमाऊँ मंडल की समीक्षा में सामने आई जानकारी के अनुसार उत्तराखंड एक जिला एक नदी योजना के तहत जिलावार प्रमुख नदियां इस प्रकार हैं:
| क्रम | जिला | चयनित नदी |
|---|---|---|
| 1 | अल्मोड़ा | जटा गंगा |
| 2 | बागेश्वर | गरुड़ गंगा |
| 3 | चम्पावत | गौड़ी नदी |
| 4 | नैनीताल | शिप्रा नदी |
| 5 | पिथौरागढ़ | तितरगाड–पूर्वी रामगंगा |
| 6 | ऊधमसिंह नगर | फीका नदी |
| 7 | चमोली | चंद्रभागा नदी |
| 8 | देहरादून | गडूल– सोंग नदी |
| 9 | हरिद्वार | पथरी नदी |
| 10 | पौड़ी गढ़वाल | नयार नदी (पूर्वी एवं पश्चिमी) |
| 11 | रुद्रप्रयाग | पुनाड़ नदी |
| 12 | टिहरी गढ़वाल | सोंग नदी |
| 13 | उत्तरकाशी | कमल गंगा नदी |
SARRA की आधिकारिक सूची में कुमाऊँ क्षेत्र के लिए जटा गंगा, गरुड़ गंगा, गौड़ी, शिप्रा और पूर्वी रामगंगा का उल्लेख है। वहीं कुमाऊँ आयुक्त की समीक्षा में ऊधमसिंह नगर की फीका नदी भी चयनित नदी के रूप में दर्ज है। गढ़वाल क्षेत्र की SARRA सूची में चंद्रभागा, सोंग, पथरी, नयार (पूर्वी एवं पश्चिमी), पुनाड़ और कमल नदी का उल्लेख है। (Sarra Uttarakhand)
परीक्षा नोट: SARRA की वेबसाइट पर पौड़ी के लिए “नयार (East & West)” एक संयुक्त प्रविष्टि है। वहीं उपलब्ध जिला-स्तरीय जानकारी के आधार पर 13 जिलों को कवर करने के लिए ऊधमसिंह नगर की फीका नदी को भी शामिल किया गया है।
13 नदियों के लिए 120 करोड़ रुपये से अधिक की DPR तैयार
जुलाई 2026 में SARRA की राज्य स्तरीय कार्यकारी समिति की बैठक में बताया गया कि 13 नदियों के लिए 120 करोड़ रुपये से अधिक की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा चुकी है।
इनमें कई परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ चुका है, जबकि कुछ परियोजनाओं को उच्चस्तरीय स्वीकृति मिल चुकी है। (Uttarakhand Dwaar)
बैठक में बागेश्वर की गरुड़ गंगा और पौड़ी की पश्चिमी नयार नदी के लिए भी विस्तृत परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत किए गए। गरुड़ गंगा के लिए करीब 12 करोड़ रुपये, जबकि पश्चिमी नयार के लिए करीब 48 करोड़ रुपये की कार्ययोजना बताई गई। दोनों प्रस्तावों की कुल लागत लगभग 60 करोड़ रुपये है। (Hashtag Uttarakhand)
वैज्ञानिक संस्थानों की मदद से होगा नदियों का अध्ययन
उत्तराखंड एक जिला एक नदी योजना की खास बात यह है कि नदी पुनर्जीवन को केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके लिए वैज्ञानिक संस्थानों की विशेषज्ञता भी ली जा रही है।
नदियों के जलागम क्षेत्र, जल प्रवाह, पर्यावरणीय स्थिति और नदी के क्षरण वाले क्षेत्रों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसके आधार पर पुनर्जीवन के लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार होगी। (Sarra Uttarakhand)
कमल गंगा नदी के लिए ICAR-IISWC से हुआ MoU
उत्तरकाशी जिले के पुरोला क्षेत्र की कमल गंगा नदी के पुनर्जीवन के लिए ICAR-Indian Institute of Soil and Water Conservation (ICAR-IISWC), देहरादून और SARRA के बीच 3 जून 2026 को समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ।
इस परियोजना में नदी के क्षरणग्रस्त क्षेत्रों की पहचान, जलागम की विशेषताओं का अध्ययन, जलवैज्ञानिक एवं पारिस्थितिक परिस्थितियों का आकलन और नदी पुनर्जीवन की विस्तृत वैज्ञानिक योजना तैयार की जाएगी। (Indian Council of Agricultural Research)
4,490 जलस्रोतों की GIS मैपिंग
नदी पुनर्जीवन के साथ उत्तराखंड में जलस्रोतों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
SARRA के भागीरथ ऐप के माध्यम से प्रदेश में 4,490 जलस्रोतों का GIS आधारित डिजिटल मानचित्रण किया जा चुका है। इससे जलस्रोतों की स्थिति और उनके भौगोलिक विवरण को डिजिटल रूप में दर्ज करने में मदद मिलेगी। (Uttarakhand Dwaar)
नदी के साथ पूरे जलागम क्षेत्र पर होगा काम
नदी का पानी केवल नदी की धारा से नहीं आता। उसके पीछे पूरा जलागम क्षेत्र काम करता है। इसलिए इस योजना में नदी के साथ-साथ उसके आसपास के जलस्रोत, धाराएं, नौले, भूजल रिचार्ज क्षेत्र और वर्षाजल संचयन व्यवस्था को भी ध्यान में रखा जा रहा है।
SARRA का व्यापक उद्देश्य प्रदेश के जलस्रोतों और नदियों के प्रवाह में वृद्धि, उनका पुनर्जीवन तथा उनकी निरंतरता सुनिश्चित करना है। इसके लिए वर्षा आधारित नदियों और धाराओं के उपचार तथा स्थानीय समुदाय की भागीदारी पर भी जोर दिया जा रहा है। (Hindustan Live)
कुमाऊं की नदियों के लिए भी बढ़ाई गई निगरानी
कुमाऊं मंडल की समीक्षा के दौरान जटा गंगा, गरुड़ गंगा, गौड़ी, शिप्रा, पूर्वी रामगंगा और फीका नदी की स्थिति की समीक्षा की गई।
इसके साथ ही कुछ क्षेत्रों में भूजल की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक सर्वे कराने के निर्देश दिए गए। इसके लिए केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) और केंद्रीय जल आयोग (CWC) की मदद लेने की बात कही गई। (Hindustan Live)
उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह योजना?
उत्तराखंड की बड़ी आबादी पेयजल, कृषि और स्थानीय जरूरतों के लिए प्राकृतिक जलस्रोतों पर निर्भर है। कई पर्वतीय क्षेत्रों में जलस्रोतों के कमजोर होने का असर छोटी नदियों और धाराओं के प्रवाह पर भी दिखाई देता है।
ऐसे में यदि नदी पुनर्जीवन के साथ जलागम क्षेत्र में वर्षाजल संरक्षण, भूजल रिचार्ज, मृदा संरक्षण और जलस्रोतों का संरक्षण किया जाता है, तो इसका फायदा केवल नदी को नहीं बल्कि आसपास के गांवों और कृषि क्षेत्र को भी मिल सकता है।
प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए महत्वपूर्ण तथ्य
उत्तराखंड एक जिला एक नदी योजना से UKPSC, UKSSSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सीधे तथ्यात्मक प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
याद रखने योग्य तथ्य
- योजना: एक जनपद–एक नदी
- राज्य: उत्तराखंड
- क्रियान्वयन संस्था: SARRA
- SARRA का पूरा नाम: Spring and River Rejuvenation Authority
- कुल जिले: 13
- प्रत्येक जिले में: एक प्रमुख नदी
- 13 नदियों की DPR: 120 करोड़ रुपये से अधिक
- GIS मैपिंग: 4,490 जलस्रोत
- GIS मैपिंग ऐप: भागीरथ ऐप
- कमल गंगा: पुरोला, उत्तरकाशी
- कमल गंगा के अध्ययन से जुड़ा संस्थान: ICAR-IISWC, देहरादून
- बागेश्वर: गरुड़ गंगा
- अल्मोड़ा: जटा गंगा
- चम्पावत: गौड़ी नदी
- नैनीताल: शिप्रा नदी
- पिथौरागढ़: पूर्वी रामगंगा
- ऊधमसिंह नगर: फीका नदी
निष्कर्ष
उत्तराखंड एक जिला एक नदी योजना राज्य में घटते जलस्रोतों और कमजोर होते नदी प्रवाह से निपटने की एक महत्वपूर्ण पहल है। सरकार ने 13 जिलों की प्रमुख नदियों को चिन्हित कर उनके पुनर्जीवन के लिए वैज्ञानिक अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की है।
इस पहल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि तैयार की गई DPR और वैज्ञानिक सिफारिशें कितनी प्रभावी ढंग से जमीन पर लागू होती हैं। यदि नदी के साथ उसके पूरे जलागम क्षेत्र और प्राकृतिक जलस्रोतों का भी संरक्षण किया गया, तो यह योजना उत्तराखंड की दीर्घकालिक जल सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
स्रोत: SARRA, उत्तराखंड सरकार; ICAR-IISWC; कुमाऊँ मंडल की समीक्षा संबंधी रिपोर्ट। (Sarra Uttarakhand)