Red Rice Lady Uttarakhand कौन हैं? पूरी जानकारी
Red Rice Lady Uttarakhand के नाम से प्रसिद्ध उत्तरकाशी की महिला किसान आज पूरे देश में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने विलुप्त हो रहे पारंपरिक लाल धान को बचाकर उत्तराखंड की पारंपरिक कृषि को नई पहचान दिलाई है। उत्तरकाशी की पहाड़ियों से शुरू हुआ यह प्रयास अब देशभर में जैविक खेती और पारंपरिक बीज संरक्षण की प्रेरणादायक कहानी बन चुका है।
कौन हैं स्वतंत्री बंधानी?
स्वतंत्री बंधानी उत्तरकाशी जनपद की यमुनाघाटी के नौगांव ब्लाक के कोठियाल गांव की रहने वाली हैं। वे पिछले एक दशक से अधिक समय से रवांई घाटी में लाल धान और मोटे अनाजों के संरक्षण, उत्पादन और किसानों को स्वरोजगार से जोड़ने का कार्य कर रही हैं।
उन्होंने पारंपरिक बीजों को गांव-गांव से एकत्र कर फिर से खेती में शामिल किया। आज उनके प्रयास से उत्तरकाशी के कई क्षेत्रों में लाल धान की खेती दोबारा शुरू हो चुकी है।
लाल धान (Red Rice) क्या है?
लाल धान उत्तराखंड की पारंपरिक धान प्रजातियों में से एक है। यह सामान्य सफेद चावल की तुलना में अधिक पौष्टिक माना जाता है।
लाल धान की मुख्य विशेषताएं
- अधिक पोषण
इसमें आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट अधिक मात्रा में पाए जाते हैं। इसे हेल्थ फूड माना जाता है। - कम पानी में खेती
यह पहाड़ी क्षेत्रों और कम पानी वाली परिस्थितियों में भी अच्छी तरह उगाया जा सकता है। - जैविक खेती के लिए उपयुक्त
लाल धान पारंपरिक और ऑर्गेनिक खेती के मॉडल में बेहद उपयोगी माना जाता है। - बाजार में अच्छी कीमत
ऑर्गेनिक और पारंपरिक खाद्यान्न की बढ़ती मांग के कारण इसका बाजार मूल्य सामान्य चावल से अधिक है।
क्यों विलुप्त हो रही थी लाल धान की खेती?
हरित क्रांति के बाद अधिक उत्पादन देने वाली नई धान किस्मों का उपयोग बढ़ा। इसके कारण पारंपरिक बीजों की खेती धीरे-धीरे कम होती गई। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में भी किसानों ने लाल धान छोड़कर अन्य फसलें उगाना शुरू कर दिया।
ऐसे समय में स्वतंत्री बंधानी ने पारंपरिक बीज संरक्षण का अभियान शुरू किया और किसानों को दोबारा लाल धान की खेती के लिए प्रेरित किया।
कृषि मंत्रालय ने क्यों दिया “रेड राइस लेडी” नाम?
स्वतंत्री बंधानी के लाल धान संरक्षण कार्य को देखते हुए भारत सरकार के कृषि मंत्रालय ने उन पर विशेष रिपोर्ट तैयार की। इसी दौरान उन्हें “रेड राइस लेडी” कहा गया।
उनका कार्य केवल खेती तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने महिलाओं और किसानों को रोजगार तथा पारंपरिक कृषि से जोड़ने का भी काम किया।
किन फसलों पर कर रही हैं कार्य?
स्वतंत्री बंधानी और उनकी संस्था द्वारा निम्न पारंपरिक फसलों के संरक्षण और संवर्धन पर कार्य किया जा रहा है:
- लाल धान (Red Rice)
- मंडवा
- झंगोरा
- कौणी
- चौलाई
सम्मान और उपलब्धियां
1. “रेड राइस लेडी” पहचान
भारत सरकार के कृषि मंत्रालय द्वारा पहचान मिली।
2. कल्याणी सम्मान
नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में कृषि और कृषक सुधार क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किया गया।
3. मुख्यमंत्री सम्मान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा सतत कृषि, खाद्य सुरक्षा और पोषण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य हेतु सम्मानित किया गया।
उत्तराखंड के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?
- पारंपरिक बीज संरक्षण
स्थानीय जैव विविधता को बचाने में मदद मिल रही है। - किसानों की आय में वृद्धि
ऑर्गेनिक और पारंपरिक उत्पादों की मांग बढ़ने से किसानों को बेहतर दाम मिल रहे हैं। - महिलाओं का सशक्तिकरण
महिलाएं खेती और स्वरोजगार से जुड़ रही हैं। - उत्तराखंड की नई पहचान
राज्य को ऑर्गेनिक और पारंपरिक कृषि मॉडल के रूप में पहचान मिल रही है।
परीक्षा उपयोगी तथ्य
- “रेड राइस लेडी” के नाम से कौन प्रसिद्ध हैं?
स्वतंत्री बंधानी - स्वतंत्री बंधानी किस जिले से संबंधित हैं?
उत्तरकाशी - लाल धान संरक्षण अभियान किस घाटी से जुड़ा है?
रवांई घाटी - “रेड राइस लेडी” नाम किस मंत्रालय से जुड़ा है?
कृषि मंत्रालय, भारत सरकार
उत्तराखंड की यह प्रेरणादायक कहानी दिखाती है कि कैसे Red Rice Lady Uttarakhand ने पारंपरिक बीज संरक्षण को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई।
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